नई दिल्ली। विपक्षी दलों के गठबंधन ‘इंडिया’ ने मंगलवार को एकजुटता दिखाते हुए संसद में वक्फ (संशोधन) विधेयक का विरोध करने के लिए संयुक्त रणनीति पर चर्चा की। इस विधेयक को चर्चा और पारित कराने के लिए पहले लोकसभा में लाया जाएगा।
विपक्षी दलों ने संसद भवन में बैठक की, जिसमें इस विवादास्पद विधेयक को लेकर रणनीति पर चर्चा की गई। बैठक में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और केसी वेणुगोपाल, समाजवादी पार्टी के नेता राम गोपाल यादव, राकांपा नेता सुप्रिया सुले, तृणमूल कांग्रेस के कल्याण बनर्जी और आप के संजय सिंह शामिल हुए।
बैठक में द्रमुक के टी आर बालू, तिरुचि शिवा और कनिमोई, राजद के मनोज कुमार झा, माकपा के जॉन ब्रिटास, भाकपा के संदोष कुमार पी, आरएसपी के एन के प्रेमचंद्रन और वाइको भी उपस्थित थे।
खरगे ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘सभी विपक्षी दल एकजुट हैं और वक्फ संशोधन विधेयक पर मोदी सरकार के असंवैधानिक एवं विभाजनकारी एजेंडे को हराने के लिए संसद के पटल पर मिलकर काम करेंगे।’’
वहीं, गांधी ने फेसबुक पर एक पोस्ट में कहा कि संसद में लोकसभा और राज्यसभा दोनों के विपक्षी नेताओं की बैठक हुई। उन्होंने कहा, ‘‘बैठक के दौरान हमने वक्फ विधेयक पर विस्तृत चर्चा की, जो कल संसद में पेश किया जाएगा।’’
कांग्रेस नेता वेणुगोपाल ने कहा, ‘‘हमें संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करनी है और यह विधेयक वास्तव में एक लक्षित कानून है। यह असंवैधानिक भी है। हम, ‘इंडिया’ गठबंधन में शामिल दल, जो संविधान में विश्वास करते हैं, विधेयक के खिलाफ मतदान करने जा रहे हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह संविधान का स्पष्ट उल्लंघन है। संविधान में विश्वास रखने वाले लोग निश्चित रूप से इसका विरोध करेंगे।’’ वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि ईसाई समुदाय की चर्चों के संबंध में चिंताओं का समाधान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘हम चाहते हैं कि मुनंबम वक्फ भूमि विवाद का मुद्दा सुलझ जाए।’’
केरल के एर्नाकुलम जिले में लगभग 400 एकड़ भूमि को लेकर राज्य के वक्फ बोर्ड और भूमि के कब्जाधारकों के बीच विवाद ने तूफान खड़ा कर दिया है। तृणमूल सांसद बनर्जी ने कहा, ‘‘हम चर्चा और मतदान में भी भाग लेंगे। हम चर्चा करना चाहते हैं लेकिन भाजपा ऐसा नहीं करना चाहती। हम संसद के पटल पर इस मामले पर चर्चा करना चाहते हैं। हम मतदान में भाग लेना चाहते हैं लेकिन भाजपा हमें चर्चा नहीं करने देगी।’’ राजद सांसद झा ने कहा कि अगर भाजपा नीत केंद्र सरकार विपक्ष को दबाने की कोशिश करेगी तो उसे विधेयक वापस लेने पर मजबूर होना पड़ेगा।
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