नई दिल्ली। चीन से सामना करने के लिए ताइवान को अमेरिका से एक बेहद खतरनाक हथियार मिलने वाला है। दरअसल, अमेरिका ताइवान को ज्वालामुखी खदान प्रणाली देने वाला है। इस हथियार को वोलकेनो भी कहा जाता है। इस हथियार की खासियत यह है कि ये कुछ ही मिनट में एक बड़े एरिया में लैंड माइंस यानी बारूदी सुरंगों को बिछा सकता है। ज्ंपूंद को इससे एंटी पर्सनल यानी सैनिकों के लिए और एंटी टैंक माइंस यानी टैंकों के लिए बारूदी सुरंगें बिछाने में महारथ हासिल होगी।
दरअसल, ‘वोलकेनो माइंस सिस्टम’ को इसलिए खतरनाक माना जा रहा है, क्योंकि चीन की तरफ से ताइवान पर कभी भी हमला किया जा सकता है। हमले के दौरान अगर चीनी सैनिक ताइवान की जमीन पर कदम रखते हैं, तो उन्हें बारूदी सुरंगों के जरिए निशाना बनाया जा सकता है. सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि चीनी टैंकों के लिए भी ‘वोलकेनो माइंस सिस्टम’ काल बनेगा। चीन चाहकर भी समुद्र के रास्ते या हेलिकॉप्टर से लैंडिंग नहीं कर पाएगा, क्योंकि उसके स्वागत के लिए बारूदी सुरंगें बिछी होंगी।
कब तक मिलेंगे हथियार?
अमेरिका से ‘वोलकेनो माइंस सिस्टम’ मिलने के बाद ताइवान बारूदी सुरंगों वाला द्वीप बन सकता है। इसके लिए ताइवान और अमेरिका के बीच 1100 करोड़ रुपये से ज्यादा की डील हुई है। ताइवान के रक्षा मंत्री ने हथियार के लिए हुए सौदे का ऐलान किया. इस हथियार का पूरा नाम ‘वोल्केनो व्हीकल-लॉन्च्ड स्क्रट्रेरबल माइंस सिस्टम’ है। सौदे के तहत माइंस सिस्टम की डिलवरी 2029 के आखिर तक हो जाएगी। सौदे के तहत हथियार को लगाने के लिए ट्रक भी दिए जाएंगे।
क्या है सिस्टम की खासियतें?
ताइवान की सेना ने बताया कि ‘वोलकेनो माइंस सिस्टम’ को तटीय इलाकों में तैनात किया जाएगा। इसकी तैनाती ताइवान के उत्तर, मध्य और दक्षिणी इलाकों में की जाएगी। सेना का कहना है कि ये माइंस सिस्टम पारंपरिक बारूदी सुरंगों के उलट है। पारंपरिक बारूदी सुरंगों को हाथों से बिछाना पड़ता है। अगर चीन की सेना जमीन से हमला करती है, तो उसे रोकने के लिए सिस्टम को बड़े क्षेत्र में तेजी से तैनात किया जा सकता है। हर एक वोलकेनो माइंस डिस्पेंसर में 960 बारूदी सुरंगें शामिल हैं। ये 1100 मीटर लंबी और 120 मीटर चौड़ी बारूदी सुरंगों को चार से 12 मिनट में लगा सकता है।
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