बस्ती। पूर्व आईएएस मेधा संस्थापक स्व0 लक्ष्मीकान्त शुक्ल को उनक 70 वें जन्म दिन पर शुक्रवार को याद किया गया। प्रेस क्लब सभागार में आयोजित कार्यक्रम में मेधा प्रवक्ता दीन दयाल त्रिपाठी ने कहा कि छात्रों को आर्थिक आधार पर शुल्क प्रतिपूर्ति और छात्रवृत्ति की सुविधा, जाति मुक्त संविधान की परिकल्पना देने वाले लक्ष्मीकान्त को सेवा काल में ही जाति राज पुस्तक लिखने के कारण बसपा की सरकार में उत्पीड़न का शिकार होना पड़ा। उनकी किताब जातिराज को तत्कालीन सरकार ने प्रतिबंधित कर दिया इसके बावजूद वे डिगे नहीं और शिक्षा, के सवाल पर सड़क से सर्वोच्च न्यायालय तक आखिरी सांस तक लड़ते रहे। उनकी प्रेरणा से मेधा लगातार शुल्क प्रतिपूर्ति और छात्रवृत्ति की सुविधा के सवाल पर संघर्षरत है और इसके बेहतर परिणाम सामने आ रहे हैं।
दीन दयाल तिवारी ने कहा कि यदि लक्ष्मीकान्त शुक्ल के संकल्पों, सिद्धान्तों का दृढता से पालन हो तो अनेक समस्याओं का समाधान हो जायेगा। कहा कि मेधा उनके सपनों को पूरा करने की दिशा में निरन्तर प्रयत्नशील है, जब तक जाति मुक्त संविधान का सपना पूरा नहीं होता चरणबद्ध ढंग से संघर्ष अनवरत जारी रहेगा। कहा कि एकल पद में आरक्षण समाप्त किये जाने की जरूरत है।
पूर्व आईएएस मेधा संस्थापक स्व0 लक्ष्मीकान्त शुक्ल के चित्र पर माल्यार्पण कर नमन् करने वालों में कौशल पाण्डेय, उमेश पाण्डेय ‘मुन्ना’, अंकेश पाण्डेय, राहुल तिवारी, प्रमोद पाण्डेय, प्रतीक मिश्र, राजेश मिश्र, गिरीराज गिरी, अनिल कुमार, नीतिन चौबे, संजय यादव, अमित पाण्डेय, कृष्णा पाण्डेय, रूद्र आदर्श पाण्डेय, सूरज, अमित पंडित आदि शामिल रहे।
No comments:
Post a Comment